सब गोलमाल है::पहले निगम के तीन पार्षदों ने की अधिकारियों की शिकायत-फिर अधिकारियों की कार्यशैली को बताया सही-और स्वयं को बताया एक जेई की साजिश का शिकार-पढ़िए खबर में क्या चल रहा है आपके नगर निगम में…..

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दैनिक रुड़की (दीपक अरोड़ा)::

रुड़की। नगर निगम पार्षदों द्वारा एक संयुक्त पत्र पर निगम के दो अधिकारियों के खिलाफ दी गयी शिकायत पर शहरी विकास मंत्री ने संज्ञान लेते हुए सचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इससे पहले बात आगे बढ़े पार्षदों किसी प्रकार की शिकायत करने से मुकरते हुए अपने आपको निगम में तैनात एक जेई की साजिश का शिकार बताते हुए शहरी विकास सचिव को पत्र लिख दिया। अब उक्त जेई के खिलाफ जांच बैठी है।

रुड़की नगर निगम के तीन पार्षदों की मोहर लगे एक पत्र पर काबीना मंत्री मदन कौशिक और शहरी विकास सचिव को तीन बिंदुओं पर एक शिकायती पत्र के माध्यम नगर निगम द्वारा क्रय किये गए सामानों में अनियमितता बरतने की शिकायत की थी। पार्षद धीरज पाल, राजेश देवी और अंकित चौधरी ने आरोप लगाया था कि सरकारी धन का दुरूपयोग इन अधिकारियों द्वारा किया गया है जिसमें विधुत तार, सेंसर, और एलईडी बल्ब को बोर्ड के गठन से एक माह पूर्व बिना निविदा प्रक्रिया अपनाए गए खरीदा गया। आरोप था कि उक्त सामान 10 लाख लागत का था जिसके बदले में 25-25 लाख का भुगतान ऑनलाइन चार किश्तों में अपने करीबी की दुकान के नाम किया गया। दूसरी शिकायत में आरोप था कि 3 ट्रैक्टर जैम पोर्टल से करीब 14 लाख में खरीदे गये। नियमानुसार इसके लिए पहले प्रशासक की अनुमति लेनी चाहिए थी। इसके साथ ही डस्टबीन को भी चार गुनी कीमत पर खरीदे जाने का आरोप लगाया था। आरोप था कि कनिष्ठ लिपिक राजीव भटनागर और सहायक नगर आयुक्त चन्द्रकान्त भट्ट ने उच्चाधिकारियों के साथ मिलकर बोर्ड गठन से पूर्व उक्त समानों की खरीदारी नियमविरुद्ध की गई।
शिकायत पर संज्ञान लेते हुए शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने उक्त अधिकारियों पर आवश्यक कार्रवाई हेतु शहरी विकास सचिव को निर्देशित किया। इससे पहले कि कोई बात आगे बढ़े उससे पहले ही तीनों पार्षदों ने अपने लैटर पैड पर पत्र लिखकर शहरी विकास सचिव को बताया कि उन्होंने किसी प्रकार की कोई शिकायत किसी अधिकारी के खिलाफ नही की। बल्कि वह अधिकारियों की कार्यशैली से पूरी तरह संतुष्ट है।इतना ही नही पार्षद धीरज पाल ने तो शहरी विकास सचिव को भेजे पत्र में बताया कि तीनों पार्षदों से जेई नरेश कुमार ने धोखे से मोहर लगवा कर साइन करवा लिए। पार्षद के अनुसार उन्होंने उस पत्र को पढ़ा नही था कि उसमें कोई शिकायत लिखी है। बल्कि जेई द्वारा उन्हें बताया गया था कि पार्षदों द्वारा लिखे गए पत्र को शासन तक भेजकर स्ट्रीट लाइट और अन्य सामान मंगाना है। वहीं इस पूरे मामले में सहायक नगर आयुक्त चन्द्रकान्त भट्ट ने कहा कि पार्षदों से धोखे में गलत पत्र पर साइन करवाये गए थे और जब पार्षदों को असलियत पता लगी तो उन्होंने सच्चाई से शहरी विकास सचिव को अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि जेई द्वारा किये गए कार्य की जांच को पत्र आया है आगे की कार्रवाई जांच पूरी होने पर की जाएगी।

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