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2/17/2026 3:51:35 PM

एस.एस.डी.पी.सी गर्ल्स (पीजी) कॉलेज में वार्षिक कला प्रदर्शनी ‘अभिव्यक्ति 2025-26’ का भव्य शुभारंभ

दैनिक रुड़की (राहुल सक्सेना)::



रुड़की। एस.एस.डी.पी.सी गर्ल्स (पीजी) कॉलेज रुड़की के चित्रकला विभाग द्वारा वार्षिक कला प्रदर्शनी ‘अभिव्यक्ति 2025-26’ का शुभारंभ मुख्य अतिथि शोभाराम प्रजापति (उपाध्यक्ष, माटी कला बोर्ड उत्तराखंड) ने दीप प्रज्वलन कर किया।कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. अलका आर्य ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि इस वर्ष प्रदर्शनी का आयोजन राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने तथा उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष को समर्पित है। प्रदर्शनी के माध्यम से सत्यम् शिवम् सुंदरम् की विराट अवधारणा, राष्ट्रप्रेम की भावना और उत्तराखंड की समृद्ध कला-संस्कृति को सृजनात्मक रूप में अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है।छात्राओं ने वंदे मातरम् गीत पर आधारित कैनवास पेंटिंग्स और विविध चित्रों को नवीन रचनात्मकता के साथ प्रस्तुत किया। प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण छात्राओं द्वारा सृजित भारत माता की भव्य झांकी तथा उत्तराखंड की लोक कला और संस्कृति का सजीव प्रदर्शन रहा। इसमें कुमाऊं की लोक कला ऐंपण, हिमालय पर आसीन महादेव की प्रतिकृति, मां सरस्वती और हनुमान की हस्तनिर्मित प्रतिमाएं, आकर्षक रंगोलियां एवं विभिन्न कलात्मक कट-आउट दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने।प्रदर्शनी में लोक कला सांझी के प्रतिरूप, मिक्स मीडिया कलाकृतियां, व्यक्ति चित्र, मिनिएचर पेंटिंग्स, मधुबनी, वारली, कलमकारी, सेंड आर्ट, लिपन आर्ट, पेपर मेशी क्राफ्ट, रिलीफ पेंटिंग्स, मिट्टी की प्रतिमाएं, पॉट्स, मंडाला आर्ट, वॉल प्लेट्स, पोस्टर्स, लैंडस्केप, म्यूरल्स, इंस्टॉलेशन, टेक्सटाइल प्रिंटिंग, डेकोरेटिव जूट बैग्स सहित हस्तकला की विविध वस्तुएं प्रदर्शित की गईं।मुख्य अतिथि शोभाराम प्रजापति ने अपने संबोधन में कहा कि वंदे मातरम् पर आधारित इस प्रदर्शनी को देखकर गर्व का अनुभव हो रहा है। छात्राओं ने देशभक्ति की भावना को अपनी कलाकृतियों में सजीव किया है। उन्होंने भारतीय संस्कृति को अपनाने और प्लास्टिक के स्थान पर माटी की वस्तुओं के उपयोग पर जोर देते हुए माटी कला में रोजगार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।प्रबंध समिति के प्रतिनिधि सौरभ भूषण शर्मा ने कहा कि ये कलाकृतियां छात्राओं के सपनों की उड़ान हैं। शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि आंतरिक क्षमता की पहचान भी है। उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भरता के इस दौर में हस्तकला छात्राओं को सफल उद्यमी बना सकती है।

प्राचार्या डॉ. अनुपमा गर्ग ने चित्रकला विभाग की उपलब्धियों की सराहना करते हुए छात्राओं के सृजनात्मक प्रयासों को प्रेरणादायी बताया। इस अवसर पर छात्राओं ने वंदे मातरम् गीत पर आधारित नृत्य प्रस्तुति भी दी। मंच संचालन डॉ. भारती शर्मा एवं डॉ. मधु मेहरा ने किया।प्रदर्शनी में सर्वश्रेष्ठ चित्रकार का पुरस्कार कु. अदिति चौधरी (एम.ए.) तथा कु. चित्राक्षी (बी.ए.) को प्रदान किया गया। आयोजन में डॉ. अलका आर्य, डॉ. अर्चना चौहान, आरती एवं हिना का विशेष सहयोग रहा।

उद्घाटन समारोह में गोपाल गुप्ता, अरविंद कुमार, अनुज चौधरी, रमेश चंद्र, हरि मोहन गुप्ता, डॉ. कुसुम लता वर्मा, डॉ. स्वर्ण लता मिश्रा, डॉ. कामना जैन, अंजलि प्रसाद, डॉ. असमा सिद्दीकी, डॉ. पारूल, डॉ. मधु, डॉ. रूचि सिंह, शायमा, काजल, मुक्ता सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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