

दैनिक रुड़की (राहुल सक्सेना):::
लंढौरा। चमन लाल महाविद्यालय में उत्तराखंड राजनीति विज्ञान परिषद के अधिवेशन के अवसर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन “अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक परिवर्तन : उपलब्धियां और चुनौतियां” विषय पर किया गया, जिसका शुभारंभ गरिमामय वातावरण में हुआ। इस महत्वपूर्ण अकादमिक आयोजन में देशभर से आए विद्वानों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि , भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद के अध्यक्ष प्रो. एम. एम. सेमवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में एक नए संवैधानिक युग की शुरुआत हुई है।

उन्होंने इसे भारतीय संघीय ढांचे की सुदृढ़ता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इससे राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूती मिली है। विशिष्ट अतिथि केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी बिहार से आए प्रो. सुनील महावर ने कहा कि इस संवैधानिक परिवर्तन के बाद जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विस्तार की दिशा में सकारात्मक पहल बताया, लेकिन साथ ही स्थानीय स्तर पर विश्वास निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। मुख्य वक्ता जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र नई दिल्ली के निदेशक आशुतोष भटनागर ने कहा कि अनुच्छेद 370 के लागू होने से लेकर उसके हटने तक इसमें कोई ठोस संशोधन नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इसके हटने के पीछे अनेक राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षा से जुड़े कारण रहे हैं। 
उन्होंने अनुच्छेद 370 के लागू होने के समय की परिस्थितियों पर विस्तार से प्रकाश डाला उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर में भारतीय संविधान का पूर्ण रूप से लागू होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे विकास की नई संभावनाएं खुली हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीरी हिंदुओं की वापसी का मुद्दा अब भी सुरक्षा और रोजगार से जुड़ी चुनौतियों के कारण जटिल बना हुआ है। संगोष्ठी में विभिन्न कॉलेजों से आए शोधार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए । विभिन्न शोध पत्रों में जम्मू कश्मीर से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की गई। वक्ताओं ने जहां एक ओर विकास, निवेश, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में उभरती संभावनाओं को रेखांकित किया, वहीं दूसरी ओर सामाजिक समरसता, राजनीतिक सहभागिता और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर भी गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया। 
महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष पं. रामकुमार शर्मा ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया । महाविद्यालय प्रबंध समिति के कोषाध्यक्ष अतुल हरित भी उपस्थित रहे l उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है अनुच्छेद 370 का हटना जम्मू कश्मीर के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा और वहां के नागरिकों को देश के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए नई दिशा देगा l महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सुशील उपाध्याय ने अपने संबोधन में इस विषय की समसामयिक प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियां न केवल ज्ञानवर्धन का माध्यम हैं, बल्कि नीति-निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 के साथ शुरू से ही कुछ विवाद जुड़े रहे हैं। इसके हटने से जम्मू कश्मीर में शेष भारत के नागरिको का वहां आवागमन बढ़ेगा जिससे वहां की वास्तविक परिस्थितियों के बारे में जानने के अवसर बढ़ेंगे और ऐसे भ्रम जो जम्मू कश्मीर को लेकर उपजे हैं उन्हें तोड़ने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नीशू कुमार ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा विषय की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य अनुच्छेद 370 के हटने के बाद उत्पन्न संवैधानिक, राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तनों का समग्र विश्लेषण करना है। इस अवसर पर 10 से अधिक पुस्तकों का विमोचन भी किया गया l मंच संचालन डॉ. मोनू कुमार ने किया l इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण एवं गैर शिक्षक कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
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