
दैनिक रुड़की (रियाज कुरैशी)::
रुड़की/हरिद्वार। उत्तराखण्ड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ़्ती शमून क़ासमी ने जनपद हरिद्वार के ग्राम बंदरजूड का दौरा कर समान नागरिक संहिता के अंतर्गत दर्ज हलाला के प्रथम प्रकरण से संबंधित पीड़िता के परिजनों से भेंट की। उन्होंने परिवार को न्यायिक प्रक्रिया में हरसंभव सहयोग और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण का भरोसा दिलाया।

इस दौरान क़ासमी ने कहा कि उत्तराखण्ड में लागू समान नागरिक संहिता महिलाओं की गरिमा, समानता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सराहना करते हुए कहा कि समाज में व्याप्त कुप्रथाओं के विरुद्ध साहसिक निर्णय लेकर उन्होंने प्रभावी नेतृत्व का परिचय दिया है।


उन्होंने स्पष्ट कहा, “समान नागरिक संहिता इस्लाम विरोधी नहीं है। इस्लाम महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और न्याय प्रदान करने की शिक्षा देता है। हलाला और तत्काल तीन तलाक जैसी कुप्रथाएं महिलाओं के अधिकारों के प्रतिकूल हैं। महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक समानता के लिए उठाया गया यह कदम सराहनीय है।”

क़ासमी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई समान नागरिक संहिता संविधान की भावना के अनुरूप है और इसका उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार एवं समान न्याय प्रदान करना है। उन्होंने समाज से धर्म के नाम पर चल रही शोषणकारी प्रथाओं के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया।

दौरे के दौरान स्थानीय ग्रामीणों एवं सामाजिक प्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया और क्षेत्रीय सामाजिक व शैक्षिक मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने ग्रामीणों से सामाजिक सद्भाव, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की अपील की।
इसके बाद मुफ़्ती शमून क़ासमी ने अंतरराष्ट्रीय शायर अफ़ज़ल मंगलोरी को मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किए जाने पर उनके रुड़की स्थित आवास पहुंचकर बधाई दी और अभिनंदन किया। इस अवसर पर उत्तराखंड नागरिक सम्मान समिति के सचिव सलमान फरीदी, इमरान देशभक्त, सैयद नफीसुल हसन, बिट्टन त्यागी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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