
दैनिक रुड़की (राहुल सक्सेना):::
रुड़की। गंगनहर किनारे स्थित मूर्ति स्थापना के विवाद के विषय में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व मेयर गौरव गोयल ने कहा कि महापुरुषों के आधार व सम्मान को देखते हुए मेरे कार्यकाल में सभी महापुरुषों की मूर्तियों को गंगा घाट पर लगाने का प्रस्ताव विधिक रूप से पारित किया गया था और सिंचाई विभाग द्वारा कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई थी।पूर्व मेयर गौरव गोयल ने कहा कि रुड़की विधायक द्वारा आज से नहीं,बल्कि जब से वे नगर पालिका के अध्यक्ष थे,उनका यह खास रवैया रहा है कि पहले वह विभागों से नोटिस दिलवाते हैं,फिर जनता अथवा समुदाय के लोगों की सहनुभूति हासिल करने के लिए दोबारा से उनको स्थापित करने का श्रेय लेते हैं।

उन्होंने कहा कि हाल ही में स्वर्णकार समाज की मूर्ति स्थापना की अनुमति के बावजूद अप्रत्यक्ष रूप से नगर विधायक ने सिंचाई विभाग से मिलीभगत कर वहां पर बुलडोजर चलवाया और जब स्वर्णकार समाज द्वारा इसका विरोध किया गया तो वाहवाही और झूठी हमदर्दी हासिल करने के लिए उन्होंने सिंचाई विभाग से दोबारा मूर्ति स्थापित किए जाने का आदेश पारित कराया।उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी जब वे नगर पालिका के अध्यक्ष थे,तो उन्होंने नगर पालिका के कर्मचारियों से नगर की जनता पर बेतहाशा हाउस टैक्स बढ़ावाकर नोटिस भिजवाए,बाद में जब तत्कालीन सभासदों और जनता ने हंगामा किया तो इसी प्रकार की हमदर्दी प्राप्त करने के लिए उनके द्वारा हाउस टैक्स को आधा माफ किया गया था।उन्होंने कहा कि नगर और क्षेत्र की जनता भली-भांति नगर विधायक के इन हथकंडों से परिचित हो चुकी है और चुनाव आने पर इस बार नगर के सभी समाज के लोग सबक सिखाएंगे।

कहा कि अपने नगर में इस प्रकार के ओछे हथकंडे व चालों से नगर की जनता पूरी तरह परिचित हो चुकी है।पूर्व मेयर गौरव गोयल ने कहा कि मेरे कार्यकाल के प्रस्ताव निकलवा कर कोई भी व्यक्ति देख सकता है,जिन महापुरुषों शहीद चंद्रशेखर आजाद,कश्यप समाज,संत रविदास व वाल्मीकि भगवान तथा भगवान परशुराम व अन्य महापुरुषों की मूर्तियों के प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए थे।उन्होंने कहा कि जब पहले से प्रस्ताव मौजूद हैं,तो इस प्रकार की ड्रामेबाजी या झूठी हमदर्दी हासिल करना और जनता को मूर्ख बनाना एक नगर विधायक को शोभा नहीं देता,इसके लिए उन्हें सर्वसमाज और नगर की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

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