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08-06-2026 16:26:58

5.82 करोड़ के टेंडर पर नगर निगम में घमासान, महापौर के खिलाफ जमकर नारेबाजी

दैनिक रुड़की (राहुल सक्सेना)::


नगर आयुक्त कार्यालय के बाहर पार्षदों का प्रदर्शन, पारदर्शिता पर उठाए सवाल; टेंडर रद्द करने की मांग तेज

रुड़की। नगर निगम रुड़की में 5.82 करोड़ रुपये के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) टेंडर को लेकर सोमवार को जमकर हंगामा देखने को मिला। बड़ी संख्या में पार्षद नगर आयुक्त कार्यालय पहुंचे और टेंडर प्रक्रिया के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान नगर आयुक्त कार्यालय के बाहर महापौर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शन कर रहे पार्षदों ने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे निरस्त करने की मांग की।

पार्षदों का आरोप है कि निगम की समितियों के गठन से पहले करोड़ों रुपये का टेंडर जारी कर दिया गया। उनका कहना है कि अधिकांश पार्षदों को इस टेंडर की जानकारी तक नहीं थी और उन्हें इस प्रक्रिया से अनभिज्ञ रखा गया। पार्षदों ने आरोप लगाया कि पारदर्शिता की अनदेखी कर जल्दबाजी में टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।

प्रदर्शन के दौरान कुछ पार्षदों और समर्थकों ने महापौर के खिलाफ नारेबाजी करते हुए टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए। नगर आयुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में टेंडर को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने तथा निगम की समितियों का गठन कर पूरे मामले पर पुनर्विचार करने की मांग की गई।

पार्षदों का कहना है कि बरसात के मौसम में शहर के कई वार्ड सड़क, नाला और जलभराव जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में नगर निगम को जनता की मूलभूत समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए।

वहीं, मेयर प्रतिनिधि ललित मोहन अग्रवाल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्षदों का विरोध तथ्यों की पूरी जानकारी के बिना किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग से संबंधित यह टेंडर सामान्य टेंडरों से अलग होता है और इसकी प्रक्रिया केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत संचालित की जाती है।

ललित मोहन अग्रवाल ने कहा कि इस प्रकार के टेंडर कोई नई व्यवस्था नहीं हैं, बल्कि वर्षों से इसी प्रक्रिया के तहत जारी होते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने और केंद्र सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए यह टेंडर आवश्यक है। इसलिए इसे लेकर फैलाए जा रहे भ्रम का कोई औचित्य नहीं है।

फिलहाल करोड़ों रुपये के इस टेंडर को लेकर नगर निगम की राजनीति गरमा गई है। एक ओर पार्षद टेंडर निरस्त करने की मांग पर अड़े हैं, तो दूसरी ओर मेयर पक्ष इसे नियमों के अनुरूप और आवश्यक प्रक्रिया बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

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