
दैनिक रुड़की (योगराज पाल)::
रुड़की। प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल में रविवार को हुए घटनाक्रम ने संगठनात्मक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया। सुबह ही संगठन के द्वारा जारी विज्ञप्ति में वरिष्ठ व्यापारी नेता एवं पूर्व नगर अध्यक्ष सुनील साहनी को कार्यवाहक नगर अध्यक्ष तथा राहुल शर्मा को नगर महामंत्री नियुक्त किए जाने की घोषणा की गई थी। लेकिन शाम होते-होते सुनील साहनी ने इस दायित्व को स्वीकार करने में असमर्थता जताते हुए पद छोड़ने का निर्णय सार्वजनिक कर दिया।
सुनील साहनी ने प्रदेश महामंत्री प्रकाश चंद्र मिश्रा को भेजे पत्र में कहा कि वह पूर्व में दो बार नगर अध्यक्ष के दायित्व का निर्वहन कर चुके हैं और व्यापार मंडल के प्रति उनकी सदैव आस्था एवं सम्मान रहा है। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में संगठन में कुछ ऐसे पदाधिकारी भी हैं जिनका स्वयं का कोई व्यापारिक सरोकार नहीं है तथा व्यापारियों की समस्याओं के प्रति अपेक्षित गंभीरता भी दिखाई नहीं देती। ऐसे माहौल में प्रभावी और सार्थक रूप से कार्य करना उनके लिए संभव नहीं है।

उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया कि वह प्रदेश उपाध्यक्ष एवं हरिद्वार मंडल प्रभारी प्रमोद जौहर का पूरा सम्मान करते हैं और उनके आग्रह पर ही बैठक में शामिल हुए थे। उस समय उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि उन्हें किसी नए दायित्व के लिए बुलाया गया है। बाद में जब उन्हें इसकी जानकारी मिली तो बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के उन्हें सम्मानित करते हुए दायित्व स्वीकार करने की घोषणा कर दी गई।

सुनील साहनी ने कहा कि गंभीरता से विचार करने के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया है कि वह कार्यवाहक नगर अध्यक्ष का दायित्व स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने संगठन से अनुरोध किया है कि इस पद के लिए किसी अन्य योग्य, सक्रिय और सक्षम व्यक्ति का चयन किया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारियों के हितों के लिए वह भविष्य में भी संगठन को अपना सहयोग देते रहेंगे।
सुनील साहनी के इस फैसले के बाद प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल को अब नगर अध्यक्ष पद के लिए नए सिरे से नाम तय करना होगा। संगठन के भीतर इस घटनाक्रम को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं चल रही हैं और आने वाले दिनों में नई नियुक्ति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
व्यापारिक और संगठनात्मक हलकों में यह घटनाक्रम दिनभर चर्चा का विषय बना रहा, क्योंकि नियुक्ति की घोषणा और उससे इस्तीफे जैसी स्थिति के बीच महज कुछ घंटों का ही अंतर रहा। अब देखना होगा कि संगठन नेतृत्व नगर अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी किसे सौंपता है और इस घटनाक्रम का संगठन की स्थानीय इकाई पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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