दैनिक रुड़की (इकराम अली)::
पिरान कलियर। मानसून की पहली तेज बारिश ने दरगाह साबिर पाक परिसर और आसपास के क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी। कुछ ही देर की बारिश में दरगाह परिसर और आसपास के बाजारों में पानी भर गया।जिससे देश-विदेश से आए जायरीन और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात ऐसे बने कि प्रशासनिक अमला सक्रिय होने से पहले स्थानीय आस्थावान लोगों ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए दरगाह परिसर में पानी फैलने से रोकने और निकासी का प्रयास शुरू कर दिया।

जानकारी के अनुसार जलभराव की स्थिति बनते ही स्थानीय लोगों ने बिना किसी स्वार्थ के सुबह से पानी की निकासी में जुटकर जायरीन को राहत पहुंचाने में लग गए। लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान ऐसी स्थिति बनने पर सबसे पहले स्थानीय लोग ही सेवा के लिए आगे आते हैं और दरगाह से जुड़े कई कार्य निस्वार्थ भाव से निभाते हैं।बारिश के बाद एक बार फिर दरगाह प्रशासन की तैयारियों और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। 
लोगों का आरोप है कि दरगाह में सैकड़ों कर्मचारी तैनात होने के बावजूद संकट की घड़ी में उनकी मौजूदगी अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं दी। यदि समय रहते जल निकासी की व्यवस्था की जाती और कर्मचारी समय रहते सक्रिय होते तो जलभराव की समस्या काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता था।
स्थानीय लोगों ने यह भी नाराजगी जताई कि सालों से दरगाह और जायरीन की सेवा करने वाले लोगों को अक्सर "फर्जी खादिम" कहकर बदनाम किया जाता है और उनका मानसिक व सामाजिक शोषण किया जाता है। उनका कहना है कि सेवा करने वालों को सम्मान मिलने के बजाय संदेह की नजर से देखा जाता है, जबकि मुश्किल समय में वही लोग सबसे पहले जिम्मेदारी निभाते हैं।
प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन, नारेबाजी
जलभराव से नाराज लोगों ने दरगाह प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर जमकर नारेबाजी की। वार्ड 6 सभासद प्रतिनिधि गुलफाम साबरी, रहीश अहमद, इस्तेखार अली, शिबलु और रईस अल्वी ने कहा कि हर वर्ष बरसात के दौरान दरगाह परिसर और आसपास के बाजारों में जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है, लेकिन इसके स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि क्षेत्र के अधिकांश नाले चोक पड़े हैं और बरसात से पहले उनकी सफाई नहीं कराई गई।
इसका परिणाम यह हुआ कि गंदा पानी दरगाह परिसर तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि दरगाह में देश-विदेश से बड़ी संख्या में जायरीन आते हैं, ऐसे में बदहाल व्यवस्थाएं क्षेत्र की छवि को भी नुकसान पहुंचा रही हैं।प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए, जल निकासी की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए और मानसून से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जाएं, ताकि भविष्य में जायरीन और स्थानीय लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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