
दैनिक रुड़की (राहुल सक्सेना)::
हरिद्वार। हर की पैड़ी पर वर्षों तक श्रद्धालुओं से भूखे और जरूरतमंद लोगों के लिए भंडारा कराने की अपील करने वाले 'भंडारे वाले बाबा' आखिरकार ऐसी अंतिम यात्रा पर निकले, जिसमें न कोई अपना साथ था और न ही वे लाखों लोग, जिन्होंने उन्हें सोशल मीडिया पर देखा, सराहा और उनकी वीडियो साझा की थीं। उनके जीवन के अंतिम पड़ाव पर हरिद्वार पुलिस ने इंसानियत का परिचय देते हुए पूरे सम्मान के साथ हिंदू रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार कराया।


कोतवाली नगर पुलिस के अनुसार 9 जुलाई को पुलिस कंट्रोल रूम के पास एक व्यक्ति का शव मिला था। कानूनी प्रक्रिया और पहचान के प्रयासों के बाद मृतक की पहचान रमाशंकर गुप्ता (58 वर्ष), निवासी हरदोई (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई। हर की पैड़ी क्षेत्र में उन्हें लोग 'भंडारे वाले बाबा' के नाम से जानते थे। वह श्रद्धालुओं से आग्रह करते थे कि वे गरीब और भूखे लोगों के लिए भंडारा कराएं। उनका सहज, मजाकिया और अपनापन भरा अंदाज लोगों को खूब पसंद आता था।

इसी कारण कई यूट्यूब चैनलों, फूड ब्लॉगरों और सोशल मीडिया क्रिएटर्स ने उनके वीडियो बनाए, जो देश-विदेश में लाखों लोगों तक पहुंचे। सोशल मीडिया पर उनकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति की थी, जो दूसरों का पेट भरने की प्रेरणा देता था।

लेकिन नियति का दूसरा ही फैसला था। पुलिस ने जब उनके परिजनों से संपर्क किया तो उन्होंने आर्थिक तंगी के कारण हरिद्वार आने में असमर्थता जताई। इसके बाद 12 जुलाई को पोस्टमार्टम के उपरांत कोतवाली नगर पुलिस ने खड़खड़ी श्मशान घाट में पूरे सम्मान के साथ हिंदू रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार कराया।

इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सोशल मीडिया की लोकप्रियता और वास्तविक जीवन की संवेदनाएं हमेशा एक जैसी नहीं होतीं। जिनकी मुस्कान और अपील पर लाखों लोगों ने वीडियो देखे, उनके अंतिम सफर में कोई नहीं पहुंच सका। ऐसे समय में खाकी ने केवल अपनी ड्यूटी नहीं निभाई, बल्कि इंसानियत का सबसे बड़ा उदाहरण भी पेश किया।

हरिद्वार पुलिस ने कहा कि "सेवा, संवेदना और मानवता ही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।" भंडारे वाले बाबा की अंतिम विदाई इस बात की गवाही बन गई कि जब अपने साथ न हों, तब भी मानवता जिंदा रहनी चाहिए।
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