
दैनिक रुड़की (इकराम अली)::
पिरान कलियर। दरगाह साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स की तैयारियों के बीच ऐतिहासिक मेहंदी डोरी की रस्म को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रबीउल अव्वल का चांद दिखाई देने के बाद ईशा की नमाज के बाद यह रस्म परंपरागत तरीके से अदा की जाएगी। इसके साथ ही साबिर पाक का सालाना उर्स विधिवत शुरू हो जाएगा।
मीडिया को जानकारी देते हुए सज्जादानशीन परिवार के सदस्य साहिबजादा शाह खालिक मियां साबरी ने बताया कि मेहंदी डोरी की रस्म की शुरुआत शाह अब्दुल रहीम साबरी कुद्दुसी के दौर से चली आ रही है। यह परंपरा आज भी दरगाह साबिर पाक के मौजूदा सज्जादानशीन के द्वारा पूरी अकीदत और सूफियाना परंपरा के अनुसार निभाई जाती है।
उन्होंने बताया कि रबीउल अव्वल का चांद नजर आने के बाद ईशा की नमाज के बाद सज्जादानशीन जायरीनों, सूफी संतों और स्थानीय लोगों के साथ नंगे पांव अपने कदीमी घर की ओर रवाना होते हैं। यह स्थान वर्तमान में शाह नन्हे मियां साबरी कुद्दुसी मरहूम के घर के नाम से जाना जाता है। मेहंदी डोरी की रस्म से पहले फातिहा ख्वानी की जाती है।
कुंवारी लड़कियां तैयार करती हैं मेहंदी और उबटन
शाह खालिक मियां ने बताया कि मेहंदी डोरी और अन्य सामग्री की व्यवस्था उनकी ओर से की जाती है। मेहंदी और उबटन तैयार करने की परंपरा भी विशेष रूप से कुंवारी लड़कियों द्वारा निभाई जाती है। इसके बाद मेहंदी डोरी को सज्जादानशीन शाह अली ऐजाज साबरी कुद्दुसी के क़दीमी पुराने घर से सूफियाना कलाम पढ़ते हुए दरगाह साबिर पाक के लिए रवाना होते है।दरगाह पहुंचने के बाद सज्जादानशीन की ओर से मेहंदी डोरी और संदल पेश किया जाता है।
इसके बाद मेंहदी को साबिर पाक के मजार शरीफ पर पेश करने की रस्म अदा की जाती है। इस दौरान बड़ी संख्या में जायरीन और अकीदतमंद शामिल होते हैं।उन्होंने बताया कि रबीउल अव्वल का चांद दिखाई देने के बाद मेहंदी डोरी की रस्म अदा की जाएगी। इसके साथ ही दरगाह साबिर पाक का 758वां सालाना उर्स शुरू हो जाएगा।
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