
दैनिक रुड़की (इकराम अली)::
पिरान कलियर।माह-ए-रबीउल अव्वल की पांच तारीख को पिरान कलियर से दरगाह साबिर पाक के मुख्य गेट से सैकड़ों अकीदतमंद झंडा और चादर लेकर ऐतिहासिक दरगाह हजरत शाह मंसूर रहमतुल्लाह अलैह के सालाना उर्स के लिए पैदल रवाना हुए। तीन दिवसीय सालाना उर्स रबीउल अव्वल की छह तारीख से शुरू होगा। उर्स में दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के पहुंचने की उम्मीद है।


बुधवार को दरगाह साबिर पाक के मुख्य गेट से सभासद गुलफाम साबरी, इस्तिकार अमन साबरी और मेहरबान साबरी के नेतृत्व में सैकड़ों अकीदतमंदों का जत्था झंडा और चादर लेकर शाह मंसूर की दरगाह के लिए रवाना हुआ। जत्थे के दरगाह पहुंचने पर उर्स कमेटी की ओर से उनका स्वागत किया जायगा।इसके बाद दरगाह पर झंडा चढ़ाया जाएगा और चादर व फूल पेश कर देश में अमन-चैन, खुशहाली, एकता और भाईचारे के लिए दुआ की जाएगी।
हर वर्ष पिरान कलियर से अकीदतमंदों का पैदल जत्था शाह मंसूर की दरगाह पर पहुंचकर चादर और फूल पेश करता है। उर्स के दौरान महफिल-ए-शमा, कुल शरीफ, बड़ी दुआ समेत विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते है। इस दौरान दरगाह पर अकीदतमंदों की ओर से लंगर का भी आयोजन किया जाता है।
घने जंगल के बीच स्थित शाह मंसूर की दरगाह के प्रति स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। बताया जाता है कि यह दरगाह करीब एक हजार वर्ष से अधिक पुरानी है और मान्यता है कि हजरत शाह मंसूर ने इसी जंगल में तप किया था। ग्रामीणों के बीच यह भी मान्यता है कि उर्स के दौरान जंगल का राजा कहे जाने वाला शेर दरगाह पर हाजिरी लगाने आता है। इसी आस्था के चलते हर वर्ष उर्स के दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंद दरगाह पर पहुंचते हैं।
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