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8/19/2026 10:11:21 PM

ऊपर वाटरप्रूफ-नीचे जलभराव- लाखों का जर्मन हैंगर बना "सफेद हाथी"-बारिश में जायरीन बेहाल...

दैनिक रुड़की (इकराम अली)::



पिरान कलियर। दरगाह साबिर पाक के उर्स में जायरीनों की सुविधा के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए वाटरप्रूफ जर्मन हैंगर तेज बारिश में ही ‘सफेद हाथी’ साबित हो गए। दरगाह कार्यालय के सामने लगाए गए जर्मन हैंगर ने ऊपर से बारिश तो रोक ली'लेकिन नीचे से घुसते पानी ने पूरी व्यवस्था की पोल खोल दी। देखते ही देखते हैंगर के अंदर पानी भर गया और बारिश से बचने पहुंचे जायरीन खुद जलभराव के बीच फंस गए।


तेज बारिश के बाद हैंगर में जगह-जगह पानी भरने से वहां ठहरे जायरीनों को अपना सामान उठाकर सुरक्षित जगह की तलाश में दर-दर भटकना पड़ा। उर्स में देश के कोने-कोने से पहुंचे जायरीनों ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बारिश से बचने के लिए बनाया गया जर्मन हैंगर ही पानी में डूब जाएगा तो जायरीन आखिर कहां जाएं।


लाखों खर्च,फिर भी बारिश में बेअसर इंतजाम


जायरीनों का कहना है कि जर्मन हैंगर पर लाखों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन जलनिकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश होते ही पानी अंदर भर रहा है। ऊपर से वाटरप्रूफ व्यवस्था दिखाई देती है,मगर नीचे से आने वाला पानी जायरीनों की परेशानी बढ़ा रहा है। ऐसे में लाखों रुपये की यह व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है।


महफिलखाना बंद होने से बढ़ी मुश्किल


सबसे बड़ी परेशानी यह है कि दरगाह प्रशासन ने महफिलखाना भी बंद कर रखा है। बताया जा रहा है कि लंबे समय से वहां जमे लोगों को हटाकर महफिलखाना खाली कराया गया, लेकिन इसके बाद उसे जायरीनों के लिए खोलने के बजाय बंद ही रखा गया है।बारिश के दौरान जब जर्मन हैंगर में पानी भर गया तो जायरीनों के सामने सुरक्षित ठिकाने का संकट खड़ा हो गया। न छत के नीचे ठहरने की जगह, न जलभराव से राहत—आखिर जायरीन जाएं तो जाएं कहां?


जायरीनों ने उठाई महफिलखाना खोलने की मांग


परेशान जायरीनों ने दरगाह प्रशासन से महफिलखाना तत्काल खोलने की मांग की है। उनका कहना है कि उर्स के दौरान हजारों जायरीन यहां पहुंच रहे हैं। ऐसे में बारिश के समय उनके लिए सुरक्षित और सूखी जगह उपलब्ध कराना दरगाह प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। अब सवाल यह है कि लाखों रुपये के जर्मन हैंगर में जलभराव के बावजूद प्रशासन कब जागेगा? क्या जायरीनों की परेशानी को देखते हुए महफिलखाना खोला जाएगा या फिर बारिश के बीच जायरीन इसी तरह दर-दर भटकने को मजबूर रहेंगे।

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