
दैनिक रुड़की (इकराम अली)::
पिरान कलियर। साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स की सातवीं तारीख पर शुक्रवार को परंपरागत बड़े लंगर का आयोजन किया गया। सूफियों, फकीरों, मस्त मलंगों और दूर-दराज से पहुंचे जायरीनों के लिए गद्दियों और खानकाहों पर लंगर बांटा गया। उर्स में जायरीनों की बढ़ती भीड़ के साथ लंगर की मात्रा भी बढ़ाई जाएगी।


सज्जादानशीन शाह अली ऐजाज साबरी कुद्दूसी की सरपरस्ती और शाह सुहैल मियां साबरी की देखरेख में सूफियों की गद्दियों पर लंगर वितरित किया गया। लंगर बांटने का सिलसिला दोनों वक्त 12 रबीउल अव्वल यानी बड़ी रोशनी तक जारी रहेगा। बड़ी रोशनी के दिन दोपहर में एक वक्त लंगर बांटा जाएगा। सूफी संत अपनी-अपनी खानकाहों पर लंगर की व्यवस्था करेंगे।लंगर इंचार्ज असलम कुरैशी के मुताबिक उर्स में 22 कुन्तल आटा ओर 2 कुन्तल 75 किलो दाल बनाई जा रही है और आने वाले जायरीनों की संख्या बढ़ने के साथ लंगर की व्यवस्था भी बढ़ाई जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक लंगर पहुंचाया जा सके।
दरगाह के खादिम और मस्त मलंग अलग-अलग स्थानों पर जाकर सूफियों, फकीरों और जायरीनों को लंगर वितरित कर रहे हैं।
1903 से चली आ रही परंपरा
बताया जाता है कि बड़े लंगर की यह परंपरा वर्ष 1903 में तत्कालीन सज्जादानशीन शाह अब्दुल रहीम साबरी ने शुरू की थी। उस समय वह उर्स में शामिल होने के लिए सूफियों और बाहर से आने वाले मेहमानों को न्योता देते थे। मेहमान अपने तंबू लगाकर उर्स में शामिल होते थे। 
उनके लिए दरगाह की ओर से लंगर भेजा जाता था। समय के साथ यह परंपरा उर्स का अहम हिस्सा बन गई और आज भी उर्स की सातवीं तारीख को बड़े लंगर की रस्म निभाई जाती है।इस मौके पर शाह यावर अली ऐजाज साबरी, सज्जादा प्रतिनिधि शाह सुहैल मियां, असलम कुरैशी,यासिर मियां,नोमी मियां, अनमोल साबरी, रहीम साबरी, तसलीम साबरी, खालिद साबरी और मुनव्वर साबरी, अब्दुल रहमान, अब्दुल सत्तार,रफीक साबरी समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
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