
दैनिक रुड़की (राहुल सक्सेना)::
रुड़की। अशोक नगर स्थित कुमाऊं भवन के प्रांगण में कुमाऊं संस्कृति विकास मंडल समिति की ओर से आयोजित कुमाऊं के पारंपरिक सातूं-आठों पर्व का गौरा और महेश्वर की विदाई के साथ धूमधाम से समापन हुआ। समापन अवसर पर कुमाऊं की लोक संस्कृति और परंपराओं की मनोहारी झलक देखने को मिली। महिलाओं और पुरुषों ने सामूहिक रूप से झोड़ा-चांचरी नृत्य प्रस्तुत कर पर्व की खुशियां मनाईं। इसके बाद भावुक माहौल में गौरा मैया और महेश्वर को विदाई दी गई।

कार्यक्रम के दौरान कुमाऊं की पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने लोकगीतों की प्रस्तुति दी। झोड़ा-चांचरी की धुन पर महिलाओं और पुरुषों ने सामूहिक नृत्य किया। पूरे प्रांगण में कुमाऊं की लोक संस्कृति और परंपराओं की छटा दिखाई दी। पर्व के समापन पर जहां लोगों के चेहरे पर उत्साह और खुशी दिखाई दी, वहीं गौरा मैया की विदाई के समय श्रद्धा और भावुकता का माहौल भी रहा।
समिति के अध्यक्ष विजय सिंह वाणी, मार्गदर्शक पूरन सिंह ज्याला एवं मथुरा दत्त कांडपाल के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने भागीदारी की। महिला उपाध्यक्ष भागीरथी एरी तथा सातूं-आठों कार्यक्रम की संयोजक कमला थापा के मार्गदर्शन में महिलाओं ने पर्व के विभिन्न आयोजनों में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में अशोक नगर, शिवाजी कॉलोनी, विजय नगर, सरिता विहार, आदर्श शिवाजी नगर, न्यू भारत कॉलोनी और गंगा एन्क्लेव सहित विभिन्न क्षेत्रों से कुमाऊं समिति से जुड़े सदस्य मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि सातूं-आठों पर्व कुमाऊं की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अवसर मिलता है।

समापन अवसर पर समिति की ओर से श्रद्धालुओं को प्रसाद और फल वितरित किए गए। इसके बाद विधि-विधान और श्रद्धा के साथ गौरा मैया को विदाई दी गई। इस दौरान उपस्थित लोगों ने अगले वर्ष फिर से इसी उत्साह और उल्लास के साथ सातूं-आठों पर्व मनाने का संकल्प लिया।
© Dainik Roorkee. All Rights Reserved. Design by Xcoders Technologies