
लंढौरा में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से खुला मामला, डेढ़ साल पहले भी हो चुकी थी कार्रवाई; संचालक ने अस्पताल न चलाने का दिया था लिखित आश्वासन
दैनिक रुड़की (रियाज कुरैशी)::
लंढौरा। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और लिखित माफीनामे के बावजूद कथित तौर पर अवैध अस्पताल का संचालन जारी रहने का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मंगलवार को रुड़की-लक्सर मार्ग पर बस स्टैंड के पास एक कॉलोनी की बिल्डिंग में संचालित किए जा रहे कथित अस्पताल पर अचानक छापेमारी की। मौके पर मरीजों का उपचार किए जाने की गतिविधियां मिलने के बाद टीम ने अस्पताल को सील कर दिया।

बताया गया कि इसी संचालक के खिलाफ करीब डेढ़ साल पहले भी स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की थी। उस समय रेलवे रोड स्थित एक बिल्डिंग में न्यू भारत हेल्थ केयर सेंटर के नाम से अस्पताल संचालित होने की जानकारी सामने आई थी। तत्कालीन एसीएमओ अनिल वर्मा की टीम ने छापेमारी कर कार्रवाई की थी। विभाग की ओर से करीब 50 हजार रुपये जुर्माना किए जाने की बात भी सामने आई थी। कार्रवाई के बाद संचालक ने स्वास्थ्य विभाग को लिखित माफीनामा देकर भविष्य में अस्पताल का संचालन नहीं करने का आश्वासन दिया था।

आरोप है कि कुछ समय बाद अस्पताल का ठिकाना बदल दिया गया और रुड़की-लक्सर मार्ग पर एक कॉलोनी की बिल्डिंग में जीवन हेल्थ केयर सेंटर के नाम से कथित तौर पर मरीजों का उपचार शुरू कर दिया गया। कुछ समय बाद अस्पताल का बोर्ड भी हटा दिया गया। स्वास्थ्य विभाग को लगातार यहां अस्पताल संचालित होने की सूचनाएं मिल रही थीं।
बताया जा रहा है कि पहले कई बार टीम कार्रवाई के लिए पहुंची, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही कथित तौर पर संचालक को इसकी सूचना मिल जाती थी। इसके बाद इलाज करा रहे मरीजों को वहां से हटा दिया जाता था। आसपास मौजूद लोगों की ओर से भी टीम को यह बताने का प्रयास किया जाता था कि यहां कोई अस्पताल नहीं चल रहा है और सामान धीरे-धीरे हटाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को रणनीति बदलते हुए अचानक छापेमारी की। इस दौरान कथित अस्पताल में मरीजों के उपचार से संबंधित गतिविधियां मिलने के बाद टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए परिसर को सील कर दिया।इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और कथित अवैध अस्पताल संचालकों पर प्रभावी निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि जब पहले कार्रवाई हो चुकी थी, जुर्माना लगाया गया था और भविष्य में अस्पताल नहीं चलाने का लिखित आश्वासन लिया गया था, तो दोबारा मरीजों का उपचार कैसे शुरू हो गया?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या केवल अस्पताल का ठिकाना बदल देने से उसके संचालन को वैध माना जा सकता है? यदि इस दौरान किसी मरीज की हालत बिगड़ती या कोई गंभीर घटना होती तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद अब पूरे मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
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