
मंगलौर सीएचसी में इंसुलिन खत्म होने का दावा, दूसरे सरकारी अस्पतालों से भी नहीं मिल रही दवा; मुख्यमंत्री से मदद की गुहार
दैनिक रुड़की (फिरोज खान)::
मंगलौर। मोहल्ला टोली में एक गरीब परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार के दो मासूम बच्चे टाइप-1 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार बच्चों को स्वस्थ रहने और जीवन बचाने के लिए रोजाना चार बार इंसुलिन का इंजेक्शन लगाना जरूरी है। समय पर इंसुलिन नहीं मिलने से उनकी हालत बिगड़ने और रक्त में शर्करा का स्तर अनियंत्रित होने का खतरा बना हुआ है।

पीड़ित पिता मोहम्मद नदीम दिहाड़ी-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता है। उसने बताया कि आर्थिक स्थिति बेहद खराब होने के बावजूद वह अब तक उधार और कर्ज लेकर बाजार से महंगी इंसुलिन खरीदकर बच्चों का इलाज कराता रहा। लेकिन अब उसकी आर्थिक क्षमता पूरी तरह जवाब दे चुकी है।

नदीम के अनुसार, पिछले कई दिनों से वह मंगलौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चक्कर काट रहा है। वहां उसे इंसुलिन उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर वापस लौटा दिया जाता है। उसका कहना है कि रुड़की, हरिद्वार और देहरादून के सरकारी अस्पतालों में इंसुलिन उपलब्ध होने की जानकारी मिलने पर उसने वहां भी मदद मांगी, लेकिन उसे यह कहकर लौटा दिया गया कि दवा उसके क्षेत्र के अस्पताल से ही मिल सकती है।
नदीम ने बताया कि नियमों और व्यवस्थाओं के बीच उसके दोनों बच्चों की जिंदगी संकट में पड़ गई है। उसने इस मामले में क्षेत्रीय विधायक से भी गुहार लगाई थी। विधायक की ओर से संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका।इंसुलिन की नियमित खुराक नहीं मिलने से बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर परिवार बेहद चिंतित है। अब लाचार पिता ने मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मार्मिक गुहार लगाई है।
उसने सरकार से जल्द बच्चों के लिए इंसुलिन उपलब्ध कराने और मंगलौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जीवनरक्षक दवा की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि दोनों मासूमों की जिंदगी बचाई जा सके।
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