
दैनिक रुड़की (इकराम अली)::
पिरान कलियर। उर्स/मेले में सफाई व्यवस्था के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने के दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आए। मेला क्षेत्र में गंदगी और कूड़े के ढेर ने जहां सफाई व्यवस्था की पोल खोल दी।वहीं अब उर्स से निकला कूड़ा रुड़की रोड पर खुले में डंप किए जाने से नई मुसीबत खड़ी हो गई है।

रुड़की रोड स्थित रही गेस्ट और मुंबई वाले मदरसे के सामने सिंचाई विभाग की भूमि पर खड़े हरे पेड़ो के बीच को कूड़ा डंपिंग स्थल बना दिया गया है। बारिश के बाद कूड़ा सड़ने से यहां से उठ रही तेज दुर्गंध ने राहगीरों और आसपास के लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। रही गेस्ट के आसपास भी दुर्गंध के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है
सवाल यह है कि जब उर्स/मेले की सफाई व्यवस्था के लिए लाखों रुपये में ठेका छोड़ा गया था। तो कूड़े का उचित निस्तारण क्यों नहीं किया गया। क्या ठेकेदार को खुले में कूड़ा डालने की छूट दे दी गई थी या जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहे।स्थानीय लोगों का कहना है कि उर्स मेले के दौरान सफाई व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन हकीकत में जगह-जगह गंदगी और कूड़े के ढेर नजर आए। अब मेले से निकले कूड़े को खुले में डंप कर स्वच्छता व्यवस्था के दावों पर ही सवालिया निशान लगा दिया गया है।लोगों ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार ठेकेदार द्वारा प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान की भावना को ही पलीता लगाने का काम किया जा रहा है।
उन्होंने प्रशासन से कूड़ा खुले में डंप करने की जांच कराने और संबंधित ठेकेदार पर कार्रवाई करने और लापरवाही सामने आने पर ठेकेदार के भुगतान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल—लाखों का ठेका आखिर किसके लिए?
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि यदि ठेकेदार को सफाई और कूड़ा निस्तारण के लिए भुगतान किया जाना है, तो फिर खुले में कूड़े के ढेर क्यों लगाए जा रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस लापरवाही पर कार्रवाई करता है या कूड़े के ढेर की तरह यह मामला भी दबा दिया जाता है।
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