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9/11/2026 2:21:02 PM

कलियर::दरगाह के खातों में 62.11 करोड़ रुपये-60 बकायादारों पर करीब सात करोड़ बकाया-आरटीआई में मिली जानकारी से सामने आया आंकड़ा-व्यवस्थाओं को लेकर उठे सवाल...

दैनिक रुड़की (इकराम अली)::



पिरान कलियर। दरगाह के खातों में 62 करोड़ 11 लाख चार हजार 115 रुपये 80 पैसे की राशि जमा होने की जानकारी आरटीआई के जवाब में सामने आई है। साथ ही 2009 से 2026 तक 60 बकायादारों पर करीब सात करोड़ रुपये बकाया होने की जानकारी दी गई है। करोड़ों की यह राशि सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि दरगाह के पास इतनी बड़ी धनराशि उपलब्ध है तो पिरान कलियर में जायरीनों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी क्यों उठानी पड़ रही है।

नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट के सचिव एवं आरटीआई कार्यकर्ता प्रियांशु कांबोज ने दरगाह कार्यालय से तीन बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। कार्यालय की ओर से दिए गए जवाब में खातों में जमा राशि और बकाया धनराशि से संबंधित आंकड़े उपलब्ध कराए गए हैं।आरटीआई में सामने आए आंकड़े ने दरगाह की व्यवस्थाओं पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। हाल ही में दरगाह साबिर पाक का सालाना उर्स-मेला संपन्न हुआ। देशभर से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचे, लेकिन उर्स के दौरान सफाई, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर अव्यवस्थाओं की शिकायतें सामने आईं।कई स्थानों पर सफाई व्यवस्था अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही और क्षतिग्रस्त सड़कों को लेकर भी लोगों को परेशानी हुई। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब दरगाह के खातों में करोड़ों रुपये की राशि उपलब्ध बताई जा रही है, तो उर्स जैसे बड़े आयोजन में व्यवस्थाओं का स्तर बेहतर क्यों नहीं दिखाई दिया।उर्स-मेला आयोजन के दौरान विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए लाखों रुपये के टेंडर किए जाने की बात सामने आती रही है। इसके बावजूद यदि सफाई व्यवस्था को लेकर शिकायतें बनी रहीं तो टेंडर की शर्तों, काम की गुणवत्ता और भुगतान की प्रक्रिया की समीक्षा जरूरी है।यह सवाल किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन और जायरीनों से जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का है।आरटीआई के जवाब में 60 बकायादारों पर करीब सात करोड़ रुपये बकाया होने की जानकारी भी दी गई है। यदि यह राशि वास्तव में लंबे समय से बकाया है तो उसकी वसूली के लिए क्या कार्रवाई की गई, कितना बकाया वसूल हुआ और कितना अभी शेष है।करोड़ों की राशि से जुड़ी आरटीआई सूचना अब केवल एक आंकड़ा नहीं रह गई है। इसके साथ दरगाह की आय, खर्च, बकाया और जायरीनों को मिलने वाली सुविधाओं के बीच तालमेल का सवाल भी जुड़ गया है।जायरीनों का कहना है कि दरगाह के पास इतनी बड़ी धनराशि होने के बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार दिखाई देना चाहिए।आरटीआई कार्यकर्ता प्रियांशु कांबोज ने दरगाह की आय-व्यय और बकाया धनराशि को लेकर पारदर्शिता तथा बेहतर व्यवस्थाओं की आवश्यकता पर जोर दिया है। हालांकि दरगाह कार्यालय की ओर से दी गई सूचना में खातों में जमा राशि का आंकड़ा बताया गया है, लेकिन इस धनराशि के उपयोग और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर अलग से सवाल उठ रहे हैं।

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