
अभिषेक शर्मा ने भगवानपुर तहसील की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, एसडीएम देवेंद्र सिंह नेगी ने आरोपों के प्रमाण मांगे; जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग
दैनिक रुड़की (राहुल सक्सेना)::
रुड़की। भगवानपुर तहसील में भूमि विवाद को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। अभिषेक शर्मा ने प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि वह पिछले 14 वर्षों से अपनी भूमि से जुड़े मामले में न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिली। उन्होंने भूमि की पैमाइश नहीं होने और पांच लाख रुपये मांगने का आरोप भी लगाया है। वहीं, एसडीएम देवेंद्र सिंह नेगी ने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए वाद का निस्तारण नियमानुसार न्यायिक प्रक्रिया के तहत किए जाने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाने वाले से प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है और ऐसा नहीं होने पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी दी है।

भूमि विवाद के समाधान में देरी का आरोप
अभिषेक शर्मा के अनुसार, उनकी भूमि से संबंधित विवाद लंबे समय से लंबित है। उनका आरोप है कि संबंधित जमीन पर सड़क का निर्माण कराया गया, लेकिन भूमि अधिग्रहण और राजस्व अभिलेखों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में वह विभिन्न स्तरों पर अपनी शिकायत रखते रहे हैं और उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं। इसके बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
फीस जमा करने के बाद भी पैमाइश नहीं होने का दावा
अभिषेक शर्मा ने बताया कि भूमि की पैमाइश कराने के लिए उन्होंने भगवानपुर एसडीएम के यहां वाद दायर किया था। उनके मुताबिक, पैमाइश के लिए छह हजार रुपये की फीस करीब दो साल पहले जमा कराई गई थी। इसके बावजूद जमीन की नाप नहीं कराई गई और बाद में वाद का निस्तारण कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि फीस जमा होने के बाद भी पैमाइश क्यों नहीं हुई और मामले को समाप्त करने का आधार क्या था।
पांच लाख रुपये मांगने का आरोप, एसडीएम ने मांगे प्रमाण
प्रेस वार्ता में अभिषेक शर्मा ने एसडीएम देवेंद्र सिंह नेगी पर पांच लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि करीब 10 से 12 दिन पहले उनसे काम कराने के एवज में रकम मांगी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि रकम नहीं देने के बाद उनके मामले का निस्तारण कर दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर, एसडीएम देवेंद्र सिंह नेगी ने आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि अभिषेक शर्मा के पास पांच लाख रुपये मांगने के संबंध में कोई प्रमाण है, तो उसे प्रस्तुत करें। उन्होंने चेतावनी दी कि आरोपों को साबित करने के लिए प्रमाण नहीं दिए गए तो वह कानूनी प्रक्रिया के तहत मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएंगे।
एसडीएम का पक्ष—नियमों के तहत हुआ वाद का निस्तारण
एसडीएम देवेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि संबंधित वाद का निस्तारण दोनों पक्षों के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए न्यायिक प्रक्रिया के तहत किया गया है। यदि अभिषेक शर्मा निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं, तो वह नियमानुसार अपील कर सकते हैं। एसडीएम के मुताबिक, किसी भी निर्णय को चुनौती देने के लिए कानूनी प्रक्रिया उपलब्ध है।
खसरा संख्या 214 और अधिग्रहण रिकॉर्ड की जांच की मांग
अभिषेक शर्मा ने खसरा संख्या 214 से जुड़े अभिलेखों में कथित गड़बड़ी और भूमि अधिग्रहण के दौरान माप में अंतर होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1905 पर शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली।
उन्होंने जिलाधिकारी हरिद्वार से मांग की है कि भूमि के मूल दस्तावेजों, अधिग्रहण से जुड़े रिकॉर्ड, सड़क निर्माण के अभिलेखों और पैमाइश की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, पांच लाख रुपये मांगने के उनके आरोप की भी जांच की जाए, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
दस्तावेजों और जांच से स्पष्ट होगी स्थिति
भूमि विवाद में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बाद अब राजस्व अभिलेखों, पैमाइश से संबंधित दस्तावेजों और वाद निस्तारण के आदेश की अहमियत बढ़ गई है। एक ओर अभिषेक शर्मा ने लंबे समय से न्याय नहीं मिलने और कथित रूप से रकम मांगे जाने के आरोप लगाए हैं, वहीं एसडीएम ने वाद के निस्तारण को नियमानुसार बताते हुए आरोपों के प्रमाण मांगे हैं।अब मामले में निष्पक्ष जांच और उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल से ही भूमि विवाद, पैमाइश में देरी और लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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