दैनिक रुड़की (राहुल सक्सेना):::
रुड़की। देशभर में आज सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ करवा चौथ का निर्जला व्रत रखा है। पूरे दिन उपवास रखने के बाद महिलाएं शाम को चंद्रमा के दर्शन कर पूजा-अर्चना के साथ अपना व्रत खोलती हैं। लेकिन खराब मौसम और आसमान में छाए बादलों के कारण कई इलाकों में चंद्र दर्शन के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
इस बीच, आचार्य रजनीश जी महाराज ने बताया कि यदि मौसम खराब होने या बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता है, तो ऐसी स्थिति में महिलाएं क्या कर सकती हैं।
आचार्य रजनीश जी महाराज के अनुसार, करवा चौथ का व्रत प्रेम, समर्पण, सेवा और त्याग का प्रतीक है। यदि चंद्रमा के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं, तो महिलाएं अपने पति का मुख देखकर उनके चरण स्पर्श कर सकती हैं। इसके साथ ही भगवान गणेश और चंद्रदेव का ध्यान करते हुए मंत्र जाप कर सकती हैं।
उन्होंने मंत्र जाप के लिए 'ॐ चन्द्रमसे नमः' का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाएं श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना के बाद व्रत का पारण कर सकती हैं। वहीं, यदि कोई महिला चंद्रमा के दर्शन करना चाहती है, तो वह ऐसे स्थान पर रहने वाले अपने रिश्तेदार को वीडियो कॉल कर सकती है, जहां आसमान साफ हो और चंद्रमा दिखाई दे रहा हो।
आचार्य रजनीश जी महाराज ने बताया कि रुड़की में चंद्रोदय का अनुमानित समय रात करीब 8 बजकर 30 मिनट है। महिलाएं स्थानीय परिस्थितियों और चंद्रोदय के समय को ध्यान में रखते हुए पूजा की तैयारी कर सकती हैं।
अंत में उन्होंने सभी सुहागिन महिलाओं को करवा चौथ की शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखी वैवाहिक जीवन और सौभाग्य की कामना की।
© Dainik Roorkee. All Rights Reserved. Design by Xcoders Technologies