

दैनिक रुड़की (राहुल सक्सेना):::
रुड़की। मदरहुड विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत हर्ष एवं गौरव का विषय है कि उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) द्वारा विश्वविद्यालय की एक महत्वपूर्ण शोध परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में शोध, नवाचार एवं वैज्ञानिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा संकाय सदस्यों की अनुसंधान के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है।
इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) नरेंद्र शर्मा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शोध परियोजना से जुड़े सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह परियोजना वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिणाम प्रदान करेगी तथा विश्वविद्यालय की शोध गतिविधियों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध होगी। विश्वविद्यालय परिवार के अन्य सदस्यों ने भी इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे संस्थान में शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
इस शोध परियोजना का नेतृत्व प्रो. (डॉ.) विकास गुप्ता, अधिष्ठाता, फैकल्टी ऑफ साइंस, एवं डॉ. सुप्रिया दुबे, सहायक प्राध्यापक, फैकल्टी ऑफ साइंस, मदरहुड विश्वविद्यालय, रुड़की द्वारा किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि प्रो. (डॉ.) विकास गुप्ता इससे पूर्व भी उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र (USERC), देहरादून से दो शोध परियोजनाएँ प्राप्त कर चुके हैं। यह उपलब्धि उनके निरंतर शोध प्रयासों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं अनुसंधान के प्रति समर्पण को दर्शाती है। UCOST द्वारा वर्तमान शोध परियोजना को स्वीकृति मिलना उनके शोध कार्यों की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस परियोजना के अंतर्गत उत्तराखंड में पाए जाने वाले विभिन्न जंगली एवं पारंपरिक रूप से उपयोग किए जाने वाले खाद्य फलों (Wild Edible Fruits) का व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। शोध के दौरान इन फलों के पोषण मूल्य, खनिज तत्वों, औषधीय गुणों, जैव सक्रिय यौगिकों तथा संभावित स्वास्थ्य लाभों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, इन फलों के प्राकृतिक अर्क का उपयोग करते हुए पर्यावरण-अनुकूल नैनोकणों (Green Synthesized Nanoparticles) के निर्माण तथा उनके संभावित जैविक अनुप्रयोगों का भी अध्ययन किया जाएगा।

इस शोध परियोजना का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध जैव विविधता में उपलब्ध ऐसे जंगली खाद्य फलों की वैज्ञानिक एवं औषधीय उपयोगिता को सामने लाना है, जिन्हें अभी तक पर्याप्त अनुसंधान एवं व्यावसायिक पहचान नहीं मिल पाई है। इस अध्ययन से भविष्य में न्यूट्रास्यूटिकल्स, हर्बल उत्पादों, औषधीय अनुसंधान तथा हरित नैनोप्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई संभावनाएँ विकसित होने की उम्मीद है। साथ ही, यह शोध स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, ग्रामीण आजीविका को प्रोत्साहन तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

UCOST द्वारा इस शोध परियोजना को प्रदान की गई स्वीकृति न केवल मदरहुड विश्वविद्यालय के लिए सम्मान एवं गौरव का विषय है, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध प्राकृतिक संपदा को वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में भी एक सराहनीय पहल है।
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