पृथ्वी पर जब-जब बढ़ा असुरों का आतंक- ईश्वर ने लिया जन्म::विष्णुप्रिया.....

Dainik roorkee October 21, 2020

दैनिक रुड़की (योगराज पाल)::
रुड़की।
पृथ्वी पर जब-जब असुरों का आतंक बढ़ा है तब-तब ईश्वर ने किसी न किसी रूप में अवतार लेकर असुरों का संहार किया है। जब धरा पर धर्म के स्थान पर अधर्म बढ़ने लगता है तब धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर को आना पड़ता है। भगवान राम ने भी पृथ्वी लोक पर आकर धर्म की स्थापना की।

यह उद्गार श्री सनातन धर्म रामलीला समिति द्वारा श्री राम मंदिर पर चल रही श्री रामकथा के दौरान कथा वाचक विष्णु प्रिया ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति ईश्वर की महत्ता को मानने से भले ही इंकार कर दे लेकिन एक न एक दिन उसे ईश्वर की महत्ता को स्वीकार करना ही पड़ता है। संसार में जितने भी असुर उत्पन्न हुए सभी ने ईश्वर के अस्तित्व को नकार दिया और स्वयं भगवान बनने का ढोंग करने लगे, लेकिन जब ईश्वर ने अपनी सत्ता की एक झलक दिखाई तो सभी का अस्तित्व धरा से ही समाप्त हो गया। अधर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो लेकिन धर्म के मार्ग पर चलने वाले के आगे अधिक समय तक नहीं टिक सकता। कथा व्यास ने कहा कि ब्राह्माण पूजनीय होता है। ब्राह्माण का कभी उपहास नहीं करना चाहिए। जिसने ब्राह्मण का उपहास किया है उसका सर्वनाश ही हुआ है। व्यास ने ब्राह्माण द्वारा भानुप्रताप को दिए गए श्राप की कथा का विस्तार से वर्णन किया। आचार्य ने श्रीराम जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि जब अयोध्या में भगवान राम का जन्म होने वाला था तब समस्त अयोध्या नगरी में शुभ शकुन होने लगे। भगवान राम का जन्म होने पर अयोध्या नगरी में खुशी का माहौल हो गया। चारों ओर मंगल गान होने लगे। राम जन्म की कथा सुन पांडाल में मौजूद महिलाएं अपने स्थान पर खड़े होकर नृत्य करने लगी।श्रद्धालुओं ने लीला का श्रवण कर पुण्य लाभ कमाया। इस अवसर पर सभा के प्रधान जगदीश लाल मेंदीरत्ता ने सबको बधाई दी, इस दौरान रत्नाकर शर्मा, धर्मपाल लखानी, सतीश कालरा, गुलशन अनेजा ,मनमोहन शर्मा,सुदेश चड्ढा, संजीव अरोड़ा, ,अमित चिटकारा , हरिओम अनेजा, गिरीश अनेजा, संजय कालरा, रवि भटेजा, किशन लाल माटा, संजीव मेंदीरत्ता, हैप्पी मेंदीरत्ता पंकज सतीजा, नितेश ग्रोवर, पंडित राजकुमार शर्मा, तिलक पिपलानी,, हरीश लखानी, उपस्थित रहे।

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