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​हाजी और काजी की जंग में इस बार भाजपा भी मार सकती है बाजी-आप प्रत्याशी भी मजबूती से मुकाबले के लिए मैदान में....

dainik roorkee January 12, 2022

दैनिक रूड़की (रियाज कुरैशी / योगराज पाल):::
मंगलौर।
मंगलौर विधानसभा सीट पर 2022 विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी तरह घमासान मचा हुआ है। हाजी और काजी रातदिन वोटरों को रिझाने में जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। कहीं काजी का पलड़ा भारी तो कहीं हाजी का पलड़ा भारी सिर्फ मुस्लिम वोटों में दिख रहा है। ऐसे में इस चुनावी जंग में भाजपा प्रत्याशी बाजी मार ले जाए तो कोई बड़ी बात नही होगी। लेकिन इसके लिए भाजपा हाईकमान को मजबूत चेहरा उतारने की जरुरत होगी। हालांकि, अभी आधा दर्जन से अधिक मंगलौर सीट से भाजपा से विधानसभा टिकट की दावेदारी कार्यकर्ता कर रहे हैं। माना जा रहा है कि बीस जनवरी से पूर्व भाजपा जनपद की सभी सीटों पर प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतार देगी। ऐसी संभावनाएं हैं। वही आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी नवनीत राठी भी मजबूती के साथ चुनाव प्रचार कर रहे हैं जिन्हें हल्के में लेना हाजी और काजी की बड़ी भूल में शामिल हो सकता है।
जनपद हरिद्वार की मंगलौर विधानसभा सीट की बात की जाए तो इस बार इस सीट पर समीकरण बसपा, कांग्रेस के विपरीत बदलते नजर आ रहे हैं और तीसरे विकल्प के रुप में भाजपा उभरती नजर आ रही है। मालूम हो कि मौजूदा विधायक काजी निजामुद्दीन पूर्व में भी एक बार विधायक रहे हैं कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तरीय नेता हैं लेकिन वह अभी क्षेत्र में इतना भी मजबूत नही हैं कि यह मान लिया जाए कि उनकी जीत निश्चित होगी हालांकि वर्तमान में उनकी सीधी टक्कर बसपा प्रत्याशी हाजी सरबत से है यह कहना गलत भी नही होगा। क्षेत्र के कुछ गांवों में खासकर मुस्लिम बस्तियों में काजी निजामुद्दीन का बोलबाला है तो कहीं हाजी सरवत करीम अंसारी पूर्व विधायक का है। ऐसे में दोनों ही नेता वोटरों को रिझाने के लिए रातदिन जीत तोड़ मेहनत कर रहे हैं। वहीं ऐसे में भाजपा को किसी भी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। 2017 चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे ऋषिपाल बालियान ने अच्छा चुनाव लड़ा और चुनाव को त्रिकोणीय मुकाबले तक लेकर गए। भाजपा को 17 हजार तीन सौ वोट मिले जो कि इस सीट पर शायद भाजपा नेताओं ने भी नही सोची होगी।
वहीं चूंकि बालियान उस चुनाव में नए थे और अब चुनाव हारने के बाद भी उन्होंने 5 वर्षों तक क्षेत्र में पूरी मेहनत की है। ऐसे में वह पहले के मुकाबले तो ज्यादा मजबूत हैं ही। वहीं भाजपा से मजबूत स्थानीय नेता के रूप में हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन करने वाले चेयरमैन सुशील राठी भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं। सुशील राठी की बात की जाए तो काफी वर्षों से सहकारिता की राजनीति कर रहे हैं वहीं लिबबरहेड़ी सहकारी समिति में चैयरमैन प्रतिनिधि के रूप में अक्सर किसानो की लड़ाई मजबूती के साथ लड़ते नजर आते हैं। यदि भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में सुशील राठी पर दांव खेला तो निश्चित ही इस बार भाजपा मंगलौर में अपना खोया हुआ वर्चस्व हासिल कर सकती है।
वही प्रदेश में पहली बार चुनाव लड़ रही है आम आदमी पार्टी ने जाट समाज से युवा चेहरा नवनीत राठी को मैदान में उतारा है नवनीत विगत कई महीनों से लगातार क्षेत्र की समस्याएं अधिकारियों तक पहुंचा रहे हैं और उनके समाधान कि लड़ाई लड़ रहे हैं और लोगों के बीच अच्छी पैठ बनाए हुए हैं। 2022 चुनाव में वोटर आम आदमी पार्टी को कितना सीरियस लेते हैं यह तो आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन फिलहाल नवनीत राठी मुकाबले में बने हुए यह कहना भी गलत नहीं होगा। ऐसे में राजनीतिक लोगों की माने तो यह भी सत्य है कि हाजी-काजी से टीस रखने वाले वोटरों का फायदा भी निश्चित रुप से भाजपा और आप को मिल सकता है।

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