नारसन स्वास्थ्य केंद्र में सबकुछ गोलमाल है-यही वह जगह है जहां सीधे रास्ते की टेड़ी चाल है- दिव्यांग चिकित्सक के द्वारा लगाए आरोप भी है गंभीर......

Dainik roorkee November 24, 2022

दैनिक रुड़की (राजेश कुमार)::






नारसन।
नारसन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सबकुछ ठीक नही चल रहा है इस बात का खुलासा हुआ एक दिव्यांग चिकित्सक द्वारा अधीक्षक पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद। आपको बता दें कि चिकित्सक द्वारा शोषण के आरोप मीडिया के कैमरे के सामने लगाए गए हैं। वहीं अधीक्षक ने सभी आरोपों को नकारते हुए मामले को अंदरूनी बताया है।


नारसन स्थित स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए आते हैं। लेकिन शायद यहां चिकित्सकों की अंदरूनी कलह इन मरीजों पर भारी पड़ रहे हैं। केंद्र में तैनात एक दिव्यांक चिकित्सक डा अल्का के लगाए गए आरोपों की माने तो उन्हे मानसिक रूप से परेशान अधीक्षक द्वारा किया जा रहा है। आरोप है कि जनवरी माह से वह और डा तारिक एक ही कमरे में ओपीडी के लिए बैठते हैं कई बार कहने पर भी अलग कक्ष की व्यवस्था नही की गई। आरोप है कि उनके कक्ष में मरीज के बैठने के लिए भी कोई कुर्सी या स्टूल आदि नहीं रखा गया है। इसके साथ ही उनके कक्ष में बने शौचालय को भी अधीक्षक द्वारा बंद करवा दिया गया है उन्हे इसके लिए भी बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं आरोप यह भी है कि अस्पताल में कुछ दलाल बिठाए गए हैं जो कि मरीजों को उनके पास आने से रोकते हैं और लम्बे समय से तैनात एक चिकित्सक के पास ही मरीजों को भेजा जाता है। वहीं बड़ा आरोप यह लगाया गया है कि अधीक्षक की कुर्सी पर उनके पति जो कि उनसे जूनियर हैं और इसी अस्पताल में तैनात है वही बैठे रहते हैं। किसी अधिकारी को शिकायत दिए जाने के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि वह मामले की शिकायत किसे रिसीव करवाए जब केंद्र में बाबू ही तैनात नही है।


बाहर की दवाई लिख रहे चिकित्सक..


अगर चर्चाओं को सही माने तो अस्पताल में आए अधिकतर मरीजों को अस्पताल में लंबे समय से तैनात एक चिकित्सक के पास ही भेजा जाता है। और उक्त चिकित्सक द्वारा अक्सर उन्हें बाहर की दवाइयां लिखी जाती हैं। चिकित्सक अस्पताल के समीप स्थित एक मेडिकल स्टोर से दवाई लाने की बात मरीजों को कहते हैं। बाहर से दवाई लिखने वाला चिकित्सक अपने आपको एक जनप्रतिनिधि का करीबी बताता है।


चिकित्सा अधीक्षक की कुर्सी पर बैठते हैं पति...


नारसन सामुदायिक चिकित्सा केंद्र की चिकित्सा अधीक्षक की कुर्सी पर उनके पति ही बैठे नजर आते हैं वहीं वह स्वयं साइड की कुर्सी पर बैठी रहती हैं। अस्पताल के कर्मियों पर भी हुकुम जूनियर पति का ही चलता है।



एक चिकित्सक हमेशा नाइट ड्यूटी पर..


उक्त केंद्र में एक चिकित्सक ऐसे भी हैं जिनकी नाइट ड्यूटी फिक्स है लेकिन अस्पताल में इमरजेंसी छोड़ दें तो शायद ही कोई मरीज वहां रात को आता हो लेकिन अक्सर यहां नाइट में चिकित्सक नदारद मिलते हैं। इस संबध में सीएमओ हरिद्वार से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह मामला पहले भी उनके संज्ञान में आया था और उनकी सैलरी भी रोकी गई थी अब ऐसा है तो फिर कारवाई की जाएगी।


क्या कहती हैं अधीक्षक...



सभी मामलों के बारे में पूछे जाने पर केंद्र की चिकित्सा अधीक्षक अचिंतन गर्ग का कहना है कि डा. अलका के द्वारा जो कहा गया है वह अस्पताल का अंदरूनी मामला है इसमें मीडिया का कोई मतलब नही बैठता। उनका कहना है कि डा अल्का द्वारा उन्हें लिखकर नही दिया गया कि उनके कक्ष में मरीज के बैठने के लिए कुर्सी नही है। वहीं उनका कहना है कि शौचालय उनके द्वारा बंद नहीं करवाया गया है। उक्त चिकित्सक कक्ष के साथ पहले महिला बाबू का कमरा था उनके साथ अलका का आपसी तालमेल था तो शौचालय खुला हुआ था अब महिला बाबू चली गई तो शौचालय बंद हो गया। वहीं उनकी कुर्सी पर पति के बैठने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि वह केंद्र की अधीक्षक हैं यह उनका अधिकार है कि वह किसे क्या काम सौंपे वरिष्ठता के आधार पर वह किसी की भी ड्यूटी लगा सकती हैं मीडिया को इस बारे में पूछने का अधिकार नही हैं। वहीं एक ही चिकित्सक की नाइट ड्यूटी लगाने और उनके ड्यूटी पर आने पर उन्होंने कहा कि वह लगातार ड्यूटी पर रहते हैं और उनके द्वारा रजिस्टर में एंट्री भी की जाती है।

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